Indian National Flag Day 2024: भारतीय राष्ट्रीय ध्वज दिवस क्यों मनाया जाता है? Tiranga Divas

National Flag Day 2024: (Tiranga Divas) इतिहास में आज का दिन हर भारतीय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। रंग, रूप, पहनावे में हम कितने ही अलग क्यों न हों, लेकिन जब हम तिरंगे के नीचे खड़े होते हैं, तो हम एक होते हैं। चाहे वह किसी भी जाती धर्म से हो एक अजीब तरीके का उमंग और जोश होता है, आज भारत की शान है, तिरंगा।

Indian National Flag Adoption Day: 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की आजादी के कुछ दिन पहले 22 जुलाई 1947 को भारत की संविधान सभा की बैठक में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया था। 2002 से पहले, भारत की आम जनता राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहरा सकती थी। सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय त्योहारों पंद्रह अगस्त स्वतंत्रता दिवस और छब्बीस जनवरी गणतंत्रता दिवस को छोड़कर।

लेकिन 26 जनवरी 2002 को, एक याचिका पर, भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया और स्वतंत्रता के कई वर्षों के बाद, भारत के नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और कारखानों में न केवल राष्ट्रीय दिवसों पर, बल्कि किसी भी दिन बिना किसी रुकावट के तिरंगा झंडा फहराने की अनुमति दी गई। कोई भी गर्व से फहरा सकते हैं, बशर्ते वे ध्वज के नियम का पालन करें और तिरंगे को अपना गौरव खोने न दें।

लेकिन क्या आप जानते हैं भारतीय तिरंगे झंडे का निर्माण किसने किया था और कब इसे अपनाया गया था? National Flag Adoption Day कब मनाया जाता है और क्यों, इतिहास – चलिए जानते हैं वस्त्र से।

National Flag Adoption Day Kab Manya Jata Hai
Dateहर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज का जन्मदिन मनाया जाता है।
स्थापना22 जुलाई 1947 को अपनाया गया
डिजाइनरDesigner – पिंगली वेंकय्याा
अनुपातIndian Flag Size Ration अनुपात- 2:3
विवरणतिरंगे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में सफेद और सबसे नीचे हरा समान अनुपात में है। सफेद पट्टी के केंद्र में एक गहरा नीला चक्र में 24 तीलियाँ होती हैं।
Indian National Flag Day (Tiranga Divas)
National Flag Day भारतीय राष्ट्रीय ध्वज दिवस

National Flag Day राष्ट्रीय ध्वज दिवस क्यों मनाया जाता है?

देश के गौरव के प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 22 जुलाई 1947 को दुनिया और भारतीय नागरिकों के सामने पेश किया था। इसी तिथि को देखते हुए हर साल 22 जुलाई को राष्ट्रीय ध्वज का जन्मदिन मनाया जाता है।

जहां पहली बार सभी को राष्ट्रीय ध्वज भेंट किया गया था। इसके बाद 15 अगस्त 1947 से 26 जनवरी 1950 तक राष्ट्रीय ध्वज को भारत अधिराज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। 1950 में जब संविधान लागू हुआ, तो इसे एक स्वतंत्र गणराज्य का राष्ट्रीय ध्वज घोषित किया गया। राष्ट्रीय ध्वज को पिंगली वेंक्य ने डिजाइन किया था।

भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का इतिहास

20वीं शताब्दी में जब हमारा देश ब्रिटिश सरकार की गुलामी से मुक्ति पाने के लिए संघर्ष कर रहा था, स्वतंत्रता सेनानियों को एक झंडे की आवश्यकता महसूस हुई क्योंकि झंडा स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति का प्रतीक रहा है।

1904 में, विवेकानंद की शिष्या सिस्टर निवेदिता ने पहली बार एक झंडा बनाया, जिसे बाद में सिस्टर निवेदिता के झंडे के रूप में जाना जाने लगा। यह ध्वज लाल और पीले रंग का बना हुआ था। जिसमें लाल रंग स्वतंत्रता संग्राम का और पीला रंग जीत का प्रतीक था। इस पर भगवान इंद्र के हथियार वज्र और सुरक्षित कमल का चित्र भी बनाया गया था। वज्र शक्ति का प्रतीक था और कमल पवित्रता का प्रतीक था।

1905-6 में- तीन रंग थे, बंगाल के विभाजन के विरोध में निकाले गए जुलूस में पहली बार तीन रंग का झंडा शचींद्र कुमार बोस द्वारा लाया गया था। झंडे में सबसे ऊपर केसरिया, बीच में पीला और सबसे नीचे हरे रंग का इस्तेमाल किया गया था। केसरिया रंग पर सफेद रंग के 8 आधे खिले हुए कमल के फूल थे। नीचे हरे रंग पर एक सूर्य और चंद्रमा का गठन किया गया था। बीच में पीले रंग पर हिंदी में वंदे मातरम लिखा हुआ था।

1907-8 में- मैडम भीकाजी कामा, विनायक दामोदर सावरकर और श्यामजी कृष्ण वर्मा द्वारा फिर से बदलाव किए गए। इसे मैडम भीकाजी कामाध्वज भी कहा जाता था। यह झंडा 22 अगस्त 1907 को मैडम भीकाजी कामा द्वारा जर्मनी में फहराया गया था। यह पहली बार था जब भारतीय ध्वज को देश के बाहर विदेशी धरती पर फहराया गया था। इस झंडे में सबसे ऊपर हरा रंग बीच में केसरिया और सबसे नीचे लाल रंग का था। इस ध्वज में धार्मिक एकता को दर्शाते हुए हरा रंग इस्लाम का प्रतीक था और केसर हिंदू धर्म का प्रतीक था और सफेद ईसाई और बौद्ध धर्म दोनों का प्रतीक था।

1916 में- में पिंगली वेंकय्या नाम के एक लेखक ने एक झंडा बनाया, जिसमें पूरे देश को साथ लेकर चलने की उनकी सोच साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने महात्मा गांधी से भी मुलाकात की और उनकी राय ली। गांधीजी ने उन्हें इसमें चरखा जोड़ने को कहा। पिंगली ने पहली बार खादी के कपड़े से झंडा बनाया। इसमें लाल और हरे रंग बनाए और बीच में चरखा भी बनाया इस झंडे को देखकर महात्मा गांधी ने इसे खारिज कर दिया, उन्होंने कहा कि लाल रंग हिंदू का प्रतीक है और हरा रंग मुस्लिम जाति का प्रतीक है। देश इस झंडे से एकताबद्ध होता नहीं दिख रहा है।

1917 में- बाल गंगाधर तिलक ने नए ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया। इस झंडे के शीर्ष पर यूरोपीय देश का झंडा भी लगा हुआ था, बाकी जगह पर 5 लाल और 5 नीली रेखाएँ थीं। इसमें हिन्दुओं की धार्मिकता को दर्शाने के लिए सप्तऋषि कहे जाने वाले 7 तारे बनाए गए थे। इसमें एक अर्धचंद्र और एक तारा भी बनाया गया था।

1921 में- इस झंडे में भी 3 रंग थे, झंडे में सफेद रंग देश के अल्पसंख्यक, हरा रंग मुस्लिम जाति और लाल रंग हिंदू और सिख जातियों का प्रतिनिधित्व करता है। बीच में चरखा, जिससे पूरी जाति की एकता का पता चलता था।

1931 में- झंडे में लाल रंग को बदलकर गेरू कर दिया गया। यह रंग हिंदू मुस्लिम जाति दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। लेकिन इसके बाद सिख जाति के लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज में अपनी जाति प्रकट करने की एक अलग मांग की। इसके फलस्वरूप पिंगली ने एक नया झंडा बनाया, जिसमें सबसे ऊपर केसरिया था, फिर सफेद रंग के अंत में हरा। इसके बीच में एक नीला चरखा था।

1947 में- देश के स्वतंत्र होने से कुछ दिन पहले देश के पहले राष्ट्रपति और समिति के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज के बारे में बात करने के लिए एक बैठक बुलाई थी। 22 जुलाई 1947 को स्वतंत्र भारत के संविधान को लेकर एक बैठक का आयोजन किया गया था, जहां सभी ने सर्वसम्मति से 1931 में बने उस झंडे में बदलाव के साथ इसे अपनाया था। बीच में चरखा को अशोक चक्र से बदल दिया गया था। इस तरह हमारे देश का राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया गया।

वर्तमान में, भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की ताकत और साहस को दर्शाता है। बीच में सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सच्चाई का प्रतीक है। निचली हरित पट्टी भूमि की हरियाली, उर्वरता, वृद्धि और शुद्धता का प्रतिनिधित्व करती है।

तिरंगे के तीन रंगों का मतलब क्या है?

भारत के राष्ट्रीय ध्वज की सबसे ऊपरी पट्टी केसरिया रंग की है, जो देश की शक्ति और साहस का प्रतिनिधित्व करती है। बीच की सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सच्चाई का प्रतिनिधित्व करती है। आखिरी पट्टी का हरा रंग भूमि की उर्वरता, वृद्धि और शुभता का प्रतिनिधित्व करता है।

तिरंगा झंडा को कब अपनाया गया था?

22 जुलाई 1947 को आधिकारिक तौर पर भारतीय तिरंगे के रूप में अपनाया गया था। इसे पहली बार 15 अगस्त 1947 को फहराया गया था। तिरंगे का पहला रंग केसरिया है जो देश की ताकत और साहस का प्रतीक है। वहीं सफेद रंग को शांति और सच्चाई का प्रतीक माना जाता है और हरा रंग समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

तिरंगे के चक्र में 24 तीलियाँ क्यों होती हैं?

अशोक चक्र की 24 तीलियों से हमने मनुष्य के लिए बने 24 धार्मिक मार्गों की तुलना की है। इसलिए इन्हें मनुष्यों के लिए 24 धर्म मार्ग भी कहा जाता है। इसके साथ ही अशोक चक्र देशवासियों को सर्वांगीण समाज के प्रति उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में बताता है। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस क्यों मनाते हैं?

भारत का झंडा कितनी बार बदला गया है?

पिछले 116 सालों में देश का झंडा छह बार बदला जा चुका है। हालाँकि, ये परिवर्तन आजादी तक हुए। तिरंगे के पीछे की कहानी बहुत लंबी है, विस्तार से पढ़ने के लिए वेबसाइट पर जाये।

भारत का पहला झंडा कौन सा था?

भारत का अनौपचारिक ध्वज 1906 में था पहला राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक, कलकत्ता में फहराया गया था। इस झंडे को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।

क्या जूते पहनकर झंडा फहराया जा सकता है?

झंडा फहराते समय जूते पहनना या न पहनना कोई मायने नहीं रखता। भारतीय ध्वज संहिता में भी इस बारे में कोई निर्देश नहीं है। क्योंकि परेड के वक्त सैनिक जूते पहनते हैं।