ओणम त्योहार क्यों मनाया जाता है, Onam Tyohar कैसे मनाया जाता है? Onam Date 2024

केरल में तिरुवनंतपुरम का प्रसिद्ध त्योहार ओणम का त्योहार क्यों मनाया जाता है और Onam Festival Date कब है? (Onam Festival Date 2024, Onam Tyohar कैसे मनाया जाता है?)

भारत अनेक संस्कृतियों का जन्मस्थान है। लोग यहां अलग-अलग त्योहार मनाते हैं और ऐसा ही एक त्योहार है ओणम, जो विशेष रूप से केरल में मनाया जाता है, लेकिन यह अन्य राज्यों में भी मनाया जाता है।

  • यह विशेष रूप से खेतों में अच्छी फसल और कटाई की खुशी में मनाया जाता है।
  • ऐसा माना जाता है कि इस दिन राजा बलि धरती पर लोगो को आशीर्वाद देने के लिए आते हैं।

इस खुशी के लिए लोग श्रवण देवता और देवी की पूजा करते हैं। केरल में, यह त्योहार दशहरे के समान है. ओणम हर साल श्रवण शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है। जिसमें लोग मिलकर खुशियां मनाते हैं।

ओणम का त्यौहार कब और कहाँ मनाया जाता है?

ओणम विशेष रूप से केरल राज्य में मनाया जाता है। इस बार ओणम का पर्व 5 September से शुरू हो रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार ओणम का त्योहार भाद्रपद और आश्विन माह में मनाया जाता है। मलयालम सौर कैलेंडर के अनुसार, चिंगम के महीने में शिरुवोणम नक्षत्र में ओणम का त्योहार मनाया जाता है।

Onam Festival 2024
Start Date5th of September
End Date15th of September
विवरणओणम केरल का एक मलयाली त्योहार है। यह त्यौहार 10 दिनों तक मनाया जाता है और घरों को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है।

Onam Festival कैसे मनाया जाता है?

इस पर्व की विशेषता यह है कि लोग मंदिरों में नहीं घरों में पूजा करते हैं। ओणम केरल का एक मलयाली त्योहार है। यह त्यौहार 10 दिनों तक मनाया जाता है और घरों को फूलों और रंगोली से सजाया जाता है।

इस दिन महिलाएं कई प्रकार के भोजन बनाती हैं स्नान आदि करने के बाद

मलयाली लोग जहां भी होते हैं इस त्योहार को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

इस मौके पर केरल में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें से एक है बोट रेस। इस दौरान नौका दौड़ के साथ कथकली नृत्य और गायन भी होता है। फसल कटने की खुशी में लोगों के मन में एक नया उत्साह, नई आशा और नया विश्वास होता है।

केरल में इन दिनों चाय, अदरक, इलायची, काली मिर्च और धान की कटाई की जाती है और लोग इस त्योहार को मनाते हैं और अच्छी फसल की खुशी में आपस में खुशियां बांटते हैं।

ओणम त्योहार क्यों मनाया जाता है?

वामन पुराण की कथा के अनुसार, किसी समय पृथ्वी पर राजा बलि का शासन था और प्रजा सुखी और समृद्ध थी। एक बार राजा बलि ने विश्व विजेता बनने के लिए एक यज्ञ किया, तभी एक बरमचारी उनके द्वार पर आया और तीन पैर भूमि का दान मांगा, और राजा बलि ने वचन दिया की मै तीन कदम भूमि आपको दान करूँगा।

क्योंकि राजा बलि अपने वचन पर बहुत दृढ़ थे। वरदान पाकर उस ब्रह्मचारी ने अपना आकार बदल लिया और एक ओर से पृथ्वी और दूसरी ओर से आकाश को नाप लिया, तीसरा कदम रखने के लिए कोई जगह नहीं बची, तब राजा बलि ने विनम्रतापूर्वक बोले हे प्रभु आप अपना तीसरा कदम मेरे शिर पर रखे, और राजा बलि अपने शिष्य को चरणों में आगे कर दिया। परिणामस्वरूप, राजा बलि पाताल लोक में चला गया।

वह ब्रह्मचारी कोई और नहीं बल्कि खुद भगवान विष्णु थे, बाद में भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि राजा बलि साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आएंगे। भारतीय पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा बलि ओणम के त्योहार पर केरल आते हैं और दस दिनों तक रहते हैं, उनकी याद में ओणम का त्योहार मनाया जाता है। यह पर्व ओणम के पर्व श्रवण शुक्ल की त्रयोदशी की शुरुआत को मनाया जाता है।

ओणम 10 दिनों तक क्यों मनाया जाता है?

यह उस दिन से शुरू होता है जिसे अथम के नाम से जाना जाता है और दसवें दिन समाप्त होता है, जिसे थिरु ओणम या थिरुवोनम के नाम से जाना जाता है, जिसे ओणम के त्योहार के दौरान सबसे शुभ दिन माना जाता है। यह त्योहार परोपकारी दानव राजा महाबली के सम्मान में मनाया जाता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे इन 10 दिनों के दौरान केरल लौट आए थे।

  • पहला दिन: अथम, जब राजा महाबलि स्वर्ग से पृथ्वी के लिए निकलते हैं और लोग उनका स्वागत करने के लिए तैयार होते हैं।
  • दूसरा दिन: चितिरा, जब ओणम पुकालम, फूलों की एक गद्दी बनाई जाती है।
  • तीसरा दिन: चोधि पूक्कालम, फूलों की गद्दी में एक और परत जोड़ी जाती है।
  • चौथा दिन: विशाखम, जब प्रतियोगिताएँ शुरू होती हैं।
  • पाँचवां दिन: अनिझम, जब नौका दौड़ की तैयारी होती है।
  • छठा दिन: त्रिकेता, त्योहार की छुट्टियाँ शुरू होती हैं।
  • सातवां दिन: मूलम मंदिरों में विशेष पूजाएँ आयोजित की जाती हैं।
  • आठवां दिन: पूरादम, जब राजा महाबलि और वामन की मूर्तियाँ घर में स्थापित की जाती हैं।
  • नौवां दिन: उत्तरादम, जब महाबलि के केरल आने का दिन होता है।
  • दसवां दिन: तिरुवोणम, सबसे महत्वपूर्ण दिन, जब राजा महाबलि का स्वागत खुशी और सम्मान के साथ किया जाता है।

अवित्तोम (ग्यारहवाँ दिन): इसे तीसरे ओणम के नाम से भी जाना जाता है, जब लोग राजा के वापस आने की तैयारी करते हैं। कुछ लोग नदी या समुंदर में ओणथप्पन मूर्ति का रस्मी ढंग से बहाने का रिवाज करते हैं, जो वे अपने पूकलम के बीच में 10 दिनों तक रखते हैं। इसके बाद वे फूलों की चटाई को हटाकर साफ करते हैं। हालांकि, कुछ लोग ठीरुओणम के 28 दिनों तक भी फूलों की चटाई (पूकलम) रखते हैं। इस दिन, प्रसिद्ध बाघ नृत्य (पुलिकलि) भी प्रस्तुत किया जाता है।
चथयम (बारहवाँ दिन): सभी उत्सव आधिकारिक रूप से एक बड़े नृत्योत्सव के साथ समाप्त होते हैं।

ओणम के पीछे की असली कहानी क्या है?

भगवान विष्णु महाबली से प्रसन्न हुए और उन्हें कलियुग के अंत तक शासन करने का आदेश दिया, भगवान विष्णु ने महाबली को वरदान दिया कि वह साल में एक बार उनके राज्य का दौरा कर सकेंगे। इसलिए हर साल उनके राज्य (केरल) के लोग इस ओणम त्योहार को अपने राजा महाबली के घर वापसी के दिन के रूप में मनाते हैं।

ओणम उत्सव का मुख्य आकर्षण क्या है?

दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का मुख्य आकर्षण घर की साज-सज्जा और खान-पान होता है। ओणम हर साल श्रावण शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है जिसमें लोग एक साथ खुशियां मनाते हैं। केरल में इन दिनों फसल पकने के बाद तैयार हो जाती है और लोग फसल की अच्छी पैदावार की खुशी में इस त्योहार को मनाते हैं।

ओणम का त्यौहार कहाँ मनाया जाता है?

ओणम का त्यौहार मुख्य रूप से केरल में मनाया जाता है, लेकिन इसे पूरे दक्षिण भारत में मनाया जाता है। ओणम, जिसे मलयालम भाषा में थिरुवोनम के नाम से भी जाना जाता है, 10 दिनों तक चलने वाला त्योहार है। ओणम विशेष रूप से खेतों में फसल की अच्छी उपज के लिए मनाया जाता है।

ओणम का त्यौहार क्यों मनाते हैं?

पहला कारण यह है कि किसान इसे नई फसल की बेहतर उपज के लिए मनाते हैं। इस दिन केरल में प्रसिद्ध सर्प नौका दौड़ और कथकली नृत्य का आयोजन किया जाता है। दूसरा कारण यहां के राक्षस राजा महाबली से जुड़ा है। कहा जाता है कि राजा बलि भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे।

ओणम का त्यौहार कैसे मनाया जाता है?

ओणम के त्योहार पर केरल में लोग अपने घरों को फूलों, रंगोली आदि से सजाते हैं और घर में चड़ी, रसम, पुलीसेरी, खीर आदि स्वादिष्ट व्यंजन बनाते हैं। इस पर्व पर केरल में सभी प्रकार की खेल प्रतियोगिताएं जैसे नौका दौड़, भैंसा और सांड की दौड़ आदि आयोजित की जाती हैं।

ओणम क्या मतलब है?

यह केरल में फसलों की कटाई के बाद अगस्त-सितंबर में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है। मलयालम कैलेंडर के पहले महीने ‘कोलावरसम’, ‘चिंगम’ यानी अगस्त-सितंबर के बीच ओणम मनाने की परंपरा चली आ रही है।

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