ओजोन दिवस 2024: विश्व ओजोन दिवस क्यों मनाया जाता है, World Ozone Day Date Kab Hai?

आज की पोस्ट में हम आपको बताएंगे कि ओजोन दिवस कब मनाया जाता है, World Ozone Day क्यों मनाया जाता है? विश्व ओजोन दिवस पर निबंध हिंदी में, ओजोन क्या है? आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

World Ozone Day 2024: ओजोन परत के बारे में लोगों में जागरूक करने के मकसद से हर वर्ष 16 सितंबर को विश्व ओजोन दिवस मनाया जाता है।

वायुमंडल में ओजोन परत सूर्य से निकलने वाली हानिकारक अल्ट्रावाइलट किरणों से पृथ्वी को बचाती हैं। सूर्य से निकलने वाली ये किरणें त्वचा रोग समेत कई बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

हर साल ओजोन परत के संरक्षण के लिए एक अलग थीम तैयार करके लोगों को इसके महत्व के बारे में जानकारी दी जाती है।

World Ozone Day Kab Manaya Jata Hai?
Dateहर साल 16 September को
विवरणविश्व ओजोन दिवस पहली बार 16 सितंबर 1995 को मनाया गया था।
Pollutionइसके लिए मनुष्य जिम्मेदार है। ग्लोबल वार्मिंग के रूप में जिसका हम आज सामना कर रहे हैं।
World Ozone Day in Hindi

ओजोन परत का क्या कार्य है?

ओजोन परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी पर मौजूद जीवन की रक्षा करती है। क्योंकि पराबैंगनी किरणों से कई प्रकार की खतरनाक बीमारियां होती हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार वायुमंडल में ओजोन बहुत कम मात्रा में मौजूद है। फिर भी, यह मानव जीवन के साथ-साथ कृषि और पारिस्थितिक तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है।

पृथ्वी पर जीवन ओजोन परत के कारण ही संभव है। यह परत सूर्य की उच्च आवृत्ति वाली पराबैंगनी प्रकाश का 93-99% अवशोषित करती है।

ओजोन मुख्य रूप से समताप मंडल के निचले हिस्से में स्थित है, जो पृथ्वी की सतह से लगभग 10 किमी से 50 किमी ऊपर है, हालांकि इसकी मोटाई मौसमी और भौगोलिक रूप से भिन्न होती है।

ओजोन परत की खोज 1913 में फ्रांसीसी भौतिकविदों फैब्री चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने की थी।

ओजोन ऑक्सीजन का एक रूप है और इसे O3 के प्रतीक द्वारा दर्शाया जाता है। जब ऑक्सीजन के तीन परमाणु आपस में जुड़ते हैं, तो वे ओजोन परत का निर्माण करते हैं।

कैसे हुई विश्व ओजोन दिवस की शुरुआत

16 सितंबर 1987 को, संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में, दुनिया के 33 देशों ने कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल में ओजोन छिद्र से उत्पन्न होने वाली चिंता को दूर करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इसे ‘मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल’ कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1 जनवरी 1989 को हुई थी। इस प्रोटोकॉल का लक्ष्य वर्ष 2050 तक ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों को नियंत्रित करना था।

प्रोटोकॉल के अनुसार, ओजोन परत को नष्ट करने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) के उत्पादन और उपयोग को सीमित करने का निर्णय लिया गया।

ओजोन परत का क्षरण हो रहा है क्योंकि?

ओजोन परत के ह्रास का मुख्य कारण मनुष्य की एक आरामदायक जीवन जीने की प्रवृत्ति है। यदि ओजोन परत की मोटाई इसी तरह कम होती रही तो सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर पहुंचने लगेंगी, फलस्वरूप पृथ्वी पर जीवन का विनाश लगभग निश्चित है।

लोगों को गर्मी बर्दाश्त नहीं होती है, तो वे अपनी सुविधा के कारण घर में, ऑफिस में और वाहनों में एसी (एयर कंडीशन) लगाते हैं, इसमें क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) का उपयोग किया जाता है, जिससे ओजोन परत को नुकसान हो रहा है।

जिसका खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ा। इसके बाद 19 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 16 सितंबर को ओजोन परत के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया। विश्व ओजोन दिवस पहली बार 16 सितंबर 1995 को मनाया गया था।

ओजोन छिद्र का कारण क्या है?

इसका कारण वहां का बहुत कम तापमान है, जिसके कारण ध्रुवों के ऊपर बादल आपस में चिपक जाते हैं और एक बड़े पिंड का निर्माण करते हैं। उद्योगों से निकलने वाली क्लोरीन और ब्रोमीन जैसी गैसें इन बादलों के साथ प्रतिक्रिया करती हैं जिससे वहां ओजोन परत का क्षरण होने लगता है।

ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाले कण कैसे बनते हैं?

ओजोन प्रदूषक कण तब बनते हैं जब वायुमंडल में नाइट्रोजन ऑक्साइड और हाइड्रोकार्बन सूर्य की किरणों के साथ प्रतिक्रिया करते हैं।

वाहनों और कारखानों से निकलने वाली कार्बन-मोनोऑक्साइड और अन्य गैसों की रासायनिक प्रतिक्रिया से भी ओजोन प्रदूषक कणों की मात्रा बढ़ जाती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार ओजोन प्रदूषक की मात्रा औसतन आठ घंटे में 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

वैश्विक और क्षेत्रीय स्तर पर पृथ्वी की जलवायु में परिवर्तन चिंता का विषय बना हुआ है। ये परिवर्तन पृथ्वी के भीतर उत्तल उथल-पुथल और पृथ्वी के निवासियों द्वारा भी हो रहे हैं जो जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

इसका कारण बड़ी मिलों और फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाला प्रदूषणकारी धुंआ है। इससे पृथ्वी की ओजोन परत को नुकसान हो रहा है। ग्रीनहाउस गैसों के इस बेलगाम उत्सर्जन ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है और पृथ्वी पर जीवन के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।

ओजोन परत के क्षरण को कैसे रोका जा सकता है?

ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने का काम करती है। ओजोन परत के बिना जीवन खतरे में हो सकता है, क्योंकि अगर पराबैंगनी किरणें सीधे पृथ्वी पर पहुंचती हैं, तो वे मनुष्यों, पौधों और जानवरों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं।

ऐसे में ओजोन परत का संरक्षण बेहद जरूरी है। पृथ्वी के अंदर होने वाली घटनाओं पर हमारा नियंत्रण नहीं है, लेकिन हम ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगा सकते हैं जो हमारे नियंत्रण में हैं।

इस गंभीर समस्या का ठोस समाधान खोजने के लिए धन के स्तर पर कई प्रयास किए जाये। सबसे अधिक प्रदूषण करने वाले देशों पर अधिक दयँ दिया जाये. ग्रीनहाउस गैसों को नियंत्रित करें भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के तरीकों पर सहमत हों तथा जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने और इन गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने चाहिए।

इन सभी प्रयासों के अलावा वैज्ञानिक भी अपने स्तर पर ऐसी तकनीक विकसित करने में लगे हुए हैं जो इस जोखिम को कम करती हैं, जिसमें ऐसी तकनीक विकसित करना भी शामिल है जिसमें हानिकारक गैसों को तरल रूप में परिवर्तित करके जमीन के नीचे बने विशेष भंडारण गृहों में दबाया दबाया जा सके।

रोग की रोकथाम के लिए यह आवश्यक है कि यदि इन हानिकारक गैसों के उत्सर्जन को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सकता है, तो कम से कम इनकी मात्रा को कम से कम किया जाए ताकि इसके दुष्प्रभावों को सीमित किया जा सके।

प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। यह हवा शरीर के लिए खतरनाक है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं दूसरे राज्यों/शहरों में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ा है, वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है।

हर साल अक्टूबर से मार्च के दौरान बिगड़ती वायु गुणवत्ता लोगों के लिए घातक हो जाती है। खासकर दिवाली के बाद दिल्ली एनसीआर के निवासियों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है।

इसके मुख्य कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं, पराली जलाना और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल है। सर्दी के मौसम में ठंडी हवा नीचे की ओर बहती है, जिससे सांस के साथ-साथ कण और धूल हमारे शरीर में जाने लगते हैं।

ओजोन तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से बनी एक गैस है जो पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल और जमीनी स्तर पर पाई जाती है। यह अच्छा है या बुरा यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कहां मौजूद है।

लेकिन अगर यह जमीनी स्तर पर प्रदूषक (जैसे AC से निकलने वाली सीएफ़सी गैस) के रूप में मौजूद है तो यह सूर्य के प्रकाश के साथ परस्पर क्रिया करता है।

स्मॉग का मुख्य घटक ओजोन है, जो सांस के साथ फेफड़ों में जाकर अस्थमा अटैक का कारण बन सकता है।

पार्टीकुलेट मैटर या Pollution Matter

सरकारी एजेंसियां हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर को कम करने के लिए तरह-तरह के उपाय करती हैं। यह पार्टिकुलेट मैटर रसायन, ईंधन, कृषि के दौरान पराली जलाने, सड़क निर्माण और अन्य निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होता है।

लंबे समय तक, यह श्वसन और हृदय रोग, आंख, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, गंभीर फेफड़ों और हृदय रोगों का कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वायु प्रदूषण दुनिया में हर नौ में से एक मौत का कारण है, इस प्रकार प्रदूषण के कारण कुल 70 लाख अकाल मौतें होती हैं। जिसमें छह लाख बच्चे शामिल हैं।

सबसे खतरनाक 2.5 माइक्रोन आकार के कण हैं, जिन्हें केवल एक इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से देखा जा सकता है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

मानव शरीर का प्राकृतिक फिल्टर इन कणों को शरीर में प्रवेश करने से नहीं रोक सकता। वहीं दूसरी ओर बड़े आकार के पार्टिकुलेट मैटर लंबे समय में इंसानों के लिए घातक साबित होते हैं।

सेहत का ख्याल कैसे रखें?

सुबह घर के अंदर ही रहें, क्योंकि इस दौरान हवा की गुणवत्ता सबसे खतरनाक स्तर पर होती है। वायु गुणवत्ता स्तर खराब होने पर बाहर न जाएं। आजकल स्वास्थ्य विभाग प्रदूषण और वायु गुणवत्ता को लेकर नियमित एडवाइजरी जारी कर रहा है।

फेस मास्क पहनें, यह 90-95 पार्टिकुलेट मैटर को सांस लेने से रोकता है और इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

घर की खिड़कियां बंद रखें, कार में आते समय भी खिड़कियां बंद रखें। हो सके तो एयर प्यूरीफायर लगाएं, क्योंकि स्वच्छ हवा शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाती है।

स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सर्दियों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि वे सबसे ज्यादा असुरक्षित होते हैं। यात्रा करते समय फेस मास्क पहनने की सलाह दूंगा। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस क्यों मनाया जाता है?